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Wednesday 26 May 2010

वक्त का जादू

भोले-भाले मासूम बच्चे
खेलते-खेलते गायब हो जाएं

अल्ल-सुबह घूमने निकले बुजुर्ग
लौटकर घर न आएं

चहकती-महकती लड़कियां
ख़ौफ़ज़दा पुतलियों में बदल जाएं

देखते-देखते खुशबूदार फूल
धारदार शूल बन जाएं

हमने पहले तो नहीं देखा

भई वाह!
कैसा जबरदस्त जादू है
जो यह वक्त हमें दिखा रहा है।

मुकेश मानस
जून 2000
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