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Thursday, 24 June, 2010

दिल्ली का नव मध्य वर्ग-2

अभी कुछ दिन पहले रोहिणी में एक नया माल खुला। उसने ग्राहक खींचने के लिए डिस्काउंट थोड़ा ज्यादा कर दिया। लोग पागलों की तरह टूट पड़े। माल में जितने लोग आ सकते उससे दस गुना ज्यादा आ गये। नौबत यहाँ तक आ गई कि घुटन होने लगी। जब माल के क्स्ट्मर केयर वाले त्राही त्राही करने लगे तब जाकर मैंनेजमेंट ने लोगो का भीतर आना रुकवाया। जब मैं शाम को चार बजे माल से बाहर आया तो हज़ारों की तादात में लोग लाईन में लगे थे। ये दिल्ली का नव मध्य वर्ग है जो शनि मंदिरों के अलावा शापिंग माल मे सबसे ज्यादा दिखत है। और अन्याय के खिलाफ़ होने वाले किसी धरने-प्रदर्शन में तो दिखता ही नहीं है।

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