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Saturday 26 June 2010

समन्दर-3


फोटो: मुकेश मानस


मैं
समन्दर में
ढ़ूँढ रहा रहा अपना रंग
और समन्दर मुझमें
अपना रंग खोज रहा था


मगर रंग कहीं नहीं था
बेरंग थे हम दोंनो

26-06-2010

1 comment:

  1. अच्छी कविता है मुकेश जी
    आपसे बहुत पहले दिल्ली में पी एस यू के दिनों में मुलाकात हुई थी…कैसे हैं आप?

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