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Thursday 10 June 2010

हत्यारे

हत्यारे

हत्यारे घूम रहे हैं
खुल्लम-खुल्ला,
बड़ी शान से

अमूर्त हो रहे हैं अपराध
और हत्यारे बरी
दुनिया का कोई कानून
उन्हें हत्यारा नहीं मानता

हत्यारों को पहनाई जा रही हैं
रंग-बिरंगी पगड़ियां
उनकी मनुहार हो रही है
जय-जयकार गूंज रही है
समूचे ब्रह्मांड में

लेकिन मैं हैरान हूं
ये जानकर
कि दुनिया भर में
अनगिनत बच्चे गूंगे हो रहे हैं……

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