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Tuesday 14 December 2010

नये मुहावरे के नहीं वास्तविक मुहावरे की तलाश के कवि हैं मुकेश मानस

उपरोक्त शब्द संज्ञान और लोकमित्र प्रकाशन दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में ११ दिसंबर २०१० को हिंदी भवन, दिल्ली में आयोजित युवा कवि मुकेश मानस के कविता संग्रह "कागज एक पेड़ है" पर आयोजित परिचर्चा की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध मार्क्सवादी चिन्तक डा. आनन्द प्रकाश ने कहे। उन्होंने कहा कि आज कविता में जरूरत नये मुहावरे की नहीं वास्तविक मुहावरे की है और ये मुहावरा मुकेश मानस के यहां देखने को भी मिलता है और वो उसे लगातार तलाश करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस मायने में इनकी कविता अपने को ढूंढने की दिशा में आगे बढ़ने की कविता है। उन्होंने आगे कहा कि मुकेश मानस २१वी सदी के प्रथम दशक के समय और समाज की राजनीतिक समझ के कवि हैं। उनकी कविता राजनीतिक और कविता की भाषा राजनीतिक है जिसकी आज के समय में बेहद दरकार है। उन्होंने कहा कि मानस की कविताएँ आशा एवं संभावनाओं की कविताएँ हैं।

दलित साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर डा. जयप्रकाश कर्दम ने कहा कि मुकेश मानस मानवीय सवेदना के कवि हैं। उनकी कविता पाठक के साथ संवाद बनाती है, सोचने पर मजबूर करती है तथा वर्तमान व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि इस कवि की सबसे बड़ी ताकत ये है कि वह पाठक को असहज बना देता है। आगे उन्होंने कहा कि मुकेश मानस की कवितायें वर्तमान और भविष्य की कवितायें हैं। कवि और पत्रकार विमल कुमार ने कहा कि मुकेश मानस के रचना संसार में चीजों के समझने की समस्या नहीं है। उनकी कविताओं में ईमानदारी है। वो अपने आपको भी देख रहे हैं। अपना विश्लेषण भी कर रहे हैं। लेकिन उनकी कविताओं में वो मुहावरा नहीं है जो उन्हें अपने समय के बाकी कवियों से अलग करे।
वहीँ डा. द्वारिका प्रसाद चारुमित्र ने कहा कि जो कविता संप्रेषणीय हो ऐसी कविता की जरूरत है। लेकिन मुकेश मानस की कविता सहज और सरल होने के बावजूद बाव की गहरी अभिव्यक्ति करती है। और उनकी कविता की भाषा में पूरा सौंदर्य विद्यमान है।उन्होंने कहा कि मुकेश मानस प्रयोगधर्मी कवि हैं और अपनी कविता में सवेदना की गहराई लाने के लिए कविता के नए-नए रूपों का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि मुकेश मानस कि कविताएँ हिंदी के लिए बड़ी उपलब्धि हैं। आधुनिक कविता के विशेषज्ञ और प्रसिद्ध कवि गोबिंद प्रसाद ने कहा कि मुकेश मानस पूरे ब्रह्माण्ड में समाए हुए विषय को अपनी बाँहों में भर लेना चाहते है।

उन्होंने कहा कि यदि मुकेश मानस स्त्री , दलित , राजनीति और प्रेम पर कविताएँ लिखतें हैं तो यह दिखावा नहीं है। उन्होणे कहा कि मुकेश मानस की कवितायें इधर के विषयों कुछ नय जोड़ती है। उन्होंने कहा कि इनकी कविताओं में सरलता के बावजूद मारक क्षमता बहुत गहरी है जिससे पता चलता है कि कवि ने काव्य शिल्प पर अधिकार प्राप्त कर लिया है
मुकेश मानस की कविताओं पर बोलते हुए धुर अम्बेडकरवादी डा. सुनील कुमार सुमन ने पूरे काव्य संग्रह पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुकेश जी कि कविताएँ जिंदगी से उपजी कविताएँ है। इसी वजह से हमारी समझ में आती हैं। वो हमें अपना दोस्त बना लेती हैं। उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि वो एक बेहतर समाज का सपना देखने वाले कवि हैं।प्रो. हेमलता महिश्वर ने मानसजी के काव्य संग्रह पर बोलते हुए कहा कि 'कागज एक पेड़ है' प्रतीकात्मक शीर्षक बहुत गंभीर बातें कहता है। उन्होंने कहा कि इनकी कविताएँ विविधता से भरी हैं। प्रेम इनकी कविता का बड़ा स्वर है
परिचर्चा का आरम्भ संज्ञान का परिचय देते हुए अरुण कुमार प्रियम ने किया तथा संचालन राजेश कुमार चौहान एवं धन्यवाद् ज्ञापन संज्ञान के सदस्य ईश कुमार गंगानियाजी ने दिया.

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