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Sunday 30 October 2011

आलोचना के पुराने प्रतिमानों बात नहीं बनेगी


आलोचना के पुराने प्रतिमानों बात नहीं बनेगी
29 अक्टूबर 2011 को सत्यवती कालेज में आयोजित हिन्दी की समकालीन युवा कविता विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए प्रोफ़ेसर कर्ण सिंह चौहान ने कहा कि इतनी सारी और इतनी अच्छी कविताओं को सुनने के बाद उन पर टिप्पणी करना कविता को सामान्यीकृत करना है  और कविता कोई सामान्यीकृत करने वाली चीज नहीं है, एक ज़माना था जब चीजें बहुत स्पष्ट थीं। आज चीजें उतनी स्पष्ट नहीं हैं। यही बात आलोचना के क्षेत्र में भी लागू होती है। उन्होंने कहा कि आलोचना के पुराने प्रतिमानों बात नहीं बनेगी। ब हमें नए प्रतिमान बनाने पड़ेंगे तब तक बात अधूरी ही रहेगी।
इस संगोष्ठी में  देश के विभिन्न राज्यों के 20 युवा कवियों और दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कालेजों के 150 प्राध्यापकों और विद्यार्थियों नने हिस्सा लिया। कई मायनों में यह एक अलग तरह का और बेहद महत्वपूर्ण आयोजन था। इस महोत्सव में युवा कवियों ने कविता लेखन के अपने अनुभव, अपनी रचना प्रक्रिया और वर्तमान समय में कविता की भूमिका और उसकी चुनौतियों पर बात की ।
कार्यक्रम के उदघाटन वक्तव्य में कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कालेज के प्राचार्य डा देवेन्द्र प्रकाश ने कहा कि नई और अपनी ही तरह कदमियां करना सत्यवती कालेज की रिवायत है और कालेज की कला और सस्कृति परिषद-उत्कर्ष द्वारा हिन्दी की युवा कविता पर ये राष्ट्रीय संगोष्ठी एक ऐसा ही कदम है। उत्कर्ष के संयोजक डा0 मुकेश मानस  ने कहा कि आज के समय में कला के कुछ रुप बेहद सकट में हैं  जिनमें कविता एक है। कविता को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इसमें भी युवा कवियों को चिन्हित करना और उन्हें प्रोत्साहित करना एक बड़ा काम है । हमारा यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक कदम है। इसके बाद उत्कर्ष के बैंड राईज़िग फ़ायर ने गोरख पांडे, रघुवीर सहाय और कुंवर नारायण की कविताओं की बेहद प्रभावपूर्ण गायन प्रस्तुति की। प्रथम सत्र में भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित युवा कवि अनुज लुगुन ने कहा  मेरी कविता मेरे परिवेश से जुड़ी है। एक व्यक्ति के रूप में मेरी निर्मिति जिस तरह होती है उसी तरह से मेरी कविता की होती है। इसके बाद अरुण देव, अमित कुमार, संध्या नवोदिता, मुकुल सरल, ओमलता, मजरी श्रीवास्तव, आदि ने आपने काव्यलेखन के अनुभवपर अपनी बात रखी और अपनी कविताओं का पाठ किया।
दुसरे सत्र में चर्चित कवि श्री मिथिलेश श्रीवास्तव को उत्कर्ष की तरफ़ से प्रोफ़ेसर कर्ण सिंह चौहान ने प्रथम कविता मित्र सम्मान दिया और वरिष्ठ कवि शिवमंगल सिद्धांतकर ने शाल ओढ़ा कर मिथिलेशजी का सम्मान किया। युवा अभिनेता, नाटककार और निर्देशक विजय सिंह ने मुक्तिबोध की तीन कविताओं का नाटकीय वाचन किया। दूसरे सत्र में अशोक पांडे, गिरिराज किराड़ू, रजनी अनुरागी, पूनम तुषामड़, रमेश बर्णवाल, रेणु हुसैन, सईद अयूब कवियों ने अपना वक्तव्य रखा और अपनी कवितायें पढ़ीं।
कार्यक्रम  का संचालन डा0 राजेश चौहान और डा0 विदित अहलावत ने किया। कार्यक्रम में कई अखबारों के पत्रकार मौजूद थे जिनमें हिन्द केसरी के कार्यकारी संपादक डा0 अनिल सोलंकी और दैनिक भास्कर से स्वतंत्र मिश्र प्रमुख हैं।

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